नोटबंदी को लेकर विपक्ष के पैंतरों की काट में उतरी बीजेपी की पूरी फौज!

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नई दिल्ली। नोटबंदी का असर जनता पर पड़ने लगा है। ये सरकार और पार्टी को भी समझ में आने लगा है। तभी तो एक के बाद एक राहत के फैसलों का ऐलान होने लगा है। खुद पीएम मोदी हर रोज पूरे मसले पर पैनी निगाह बनाए हुए हैं। लेकिन, मुश्किल ये है कि पूरा विपक्ष एकजुट होकर हावी होने की कोशिश में लगा है। संसद चलने नहीं दी जा रही। सोमवार यानि नवंबर 28 को देश भर में आक्रोश दिवस मनाने का ऐलान भी विपक्ष ने कर दिया है।

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नोटबंदी को लेकर विपक्ष के पैंतरों की काट में उतरी बीजेपी की पूरी फौज!

ऐसे में पीएम मोदी ने खुद सबसे आगे बढ कर मोर्चा संभाला। हर पब्लिक प्लेटफॉर्म पर पीएम मोदी इस नोटबंदी का मसला समझाते फिर रहे हैं। पिछले मंगलवार को बीजेपी संसदीय दल की बैठक में तमाम सांसदों को भी निर्देश दिए गए कि वो अपने अपने क्षेत्रों में जाकर जनता को नोटबंदी के मतलब और इसके फायदे बताएं। अब आलम ये है कि शुक्रवार गया नहीं कि शनिवार और रविवार को सभी सांसद, मंत्री और पार्टी नेता अपने-अपने इलाकों की धूल फांकते नजर आने लगे है। यहां तक कि आरएसएस के प्रचार प्रमुख मनमोहन वैद्या ने भी एक बयान जारी कर नोटबंदी को देश के हित में बताया और तमाम राष्ट्रवादी लोगों से इसके समर्थन की अपील भी की। यानि जनता को भरोसा दिलाने के लिए अब पूरा परिवार एक हो गया है।

हर सांसद को कहा गया है कि अपने क्षेत्र में एक प्रेस कांफ्रेंस करे और साथ ही लंबी कतारों में खडे लोगों को अगर परेशानी हो रही हो तो उनसे मिलकर उनका दर्द भी बांटे। इतना ही नहीं इसके बाद अपने किए गए कार्यों की एक रिपोर्ट भी संसदीय पार्टी को सौंपनी है। कई नेताओं ने तो पार्टी के कार्यकर्ताओं में सत्ता की शिथिलता को खत्म करने के लिए नोटबंदी के समर्थन में रैलियां और पैदल मार्च तक कर डाला।

सरकार और बीजेपी का प्रचार और प्रसार का काम थमा नहीं है। सब जानते हैं फैसला बहुत बड़ा है जो जल्दी हल होने वाला नहीं। तभी तो संगठन से लेकर सरकार तक हर किसी को लोगों के बीच जाने का आदेश दे दिया है। वित्त मंत्री अरुण जेटली भी हर रोज अपने प्रवक्ताओं और एक दर्जन मंत्रियों से मुलाकात करने में लगे हैं ताकि नोटबंदी से जुड़े हर मुद्दे पर उन्हें समाझाया जा सके। अगले एक महीने तक सरकार के लगभग एक दर्जन वरिष्ठ मंत्री सांसदों की क्लास भी लेंगे। 40 सांसदों के ग्रुप बनाए जा रहे हैं और हर मंत्री एक ग्रुप से मुलाकात कर उन्हें नोटबंदी पर टिप्स देगा। ये सांसद अपने क्षेत्रों में जनता को बताएंगे की नोटबंदी देश के हित में है। ये शुरुआत हो चुकी है संसदीय कार्यमंत्री अनंत कुमार के घर नवंबर 24 को हुई बैठक से।

संसद के पूरे शीतकालीन सत्र के दौरान वरिष्ठ मंत्री सांसदों को जनता के बीच जाकर नोटबंदी की कहानी सुनाने की तैयारी कराएंगे। 28 नवंबर को जेपी नड्डा, 29 तो अरुण जेटली, 30 नवंबर को वेंकया नायडू, 6 दिसंबर को मनोहर पर्रिकर, 8 दिसंबर को सुरेश प्रभु, 12 दिसंबर को नितिन गडकरी, 13 दिसंबर को साध्वी निरंजन ज्योति और 14 दिसंबर को राजनाथ सिंह सांसदों को नुस्खा सिखाएंगे नोटबंदी पर जनता का भरोसा जीतने का। जाहिर है सरकार औऱ पार्टी के पास अब मैदान में कूदने के सवा कोई चारा नहीं, क्योंकि अगर आम आदमी परेशान हुआ या फिर विपक्ष की बातों में आ गया तो मुश्किलें बढ सकतीं हैं।

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