UP के धौलाना को मौलाना विधानसभा नहीं बनने देंगे

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव प्रचार में एक बार फिर नेताओं के तीखे बोल बोले जा रहे हैं. फिलहाल इसका ताजा उदाहरण देखने को मिला हापुड़ जिले के धौलाना विधानसभा इलाके में जहां सांसद योगी आदित्यनाथ और वहां से प्रत्याशी चार बार के पूर्व सांसद रमेश चंद्र तोमर का जिन्होंने सोमवार को एक जनसभा के दौरान विवादास्पद और भड़काऊ बयान दिए.

सबसे पहले बात करते हैं चार बार के पूर्व सांसद और वर्तमान में धौलाना विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी रमेश चन्द्र तोमर का. भाषण शुरू करते ही उन्होंने बोला कि मेरे मुस्लिम दोस्त का फोन आया था. उन्होंने कहा कि हम 78 हजार हैं और बाकी के कुछ और लोगों को मिलाकर बन जाते हैं सवा लाख. लेकिन ये सवा लाख वाले गुंडागर्दी करेंगे तो इनका इलाज है हमारे पास. डाढ़ीवाले घर में घुस जाएंगे तो उसका इलाज है हमारे पास. हम ढाई लाख हैं. ढाई लाख में से अगर 90 फीसदी वोट करें तो डेढ़ लाख के घर में घुस जाएंगे. जो आपकी ओर देखेगा उसकी आंख निकाल लेंगे.

बात यहीं खत्म नहीं हुई. तोमर ने कहा धौलाना विधानसभा को मौलाना विधानसभा बनने से बचाओ. यही नहीं तोमर ने अपने इस भाषण का पूरी तरीके से बचाव किया. न्यूज18 इंडिया से खास बातचीत में उन्होंने कहा कि मैंने जो कहा वो सही कहा. जब वो ऐसा करेंगे तो जवाब हमारे भी पास है. बातचीत में उन्होंने साफ कहा कि उनका इशारा मुस्लिमों की ओर है. अगर वो ऐसा करेंगे तो हम भी वैसा ही करेंगे. साथ ही तोमर ने ये भी दावा किया कि वो माडल कोड आफ कंडक्ट नहीं तोड़ रहे हैं.

वहीं दूसरी ओर बीजेपी के फायरब्रैंड नेता और सांसद योगी आदित्यनाथ के भी लफ्ज विवादों भरे ही रहे. योगी आदित्यनाथ का कैराना पलायन के मुद्दे पर कहना था कि मुझे माथे पर चिन्ता होती है. कैसे हालात हैं यहां पर. कहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश कश्मीर न बन जाए. लोग कैराना, शामली जैसे इलाकों में पलायन कर रहे हैं. हम इस इलाके को कश्मीर नहीं बनने देंगे. गोहत्या के मुद्दे पर योगी की राय थी कि यहां अगर बैलगाड़ी या फिर गाय खड़ी कर दो तो वो गायब हो जाते हैं. हम सत्ता में आएंगे तो ऐसी चीजें करेंगे.

योगी ने कहा कि हम पलायन को रोकने के लिए टास्क फोर्स भी बनाएंगे, जबकि राम मंदिर के मुद्दे पर योगी ने कहा कि मैंने रमेश चंद्र तोमर की सद्दाम हुसैन के साथ फोटो देखी थी. बाबरी कांड के बाद ये उस जगह के शासक से मिलने गए जहां से मुस्लिमों का उदय हुआ था. उस इलाके से मस्जिद हटा दिया गया तो वहां के मुस्लिमों ने कुछ नहीं कहा. लेकिन यहां कार सेवकों ने जर्जर ढांचा गिरा दिया तो मुस्लिमों को इतनी तकलीफ क्यों है.

अब सवाल ये उठता है कि चुनाव आयोग इन भाषणों का किस तरीके से आंकलन करता है.

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