अरविंद केजरीवाल की Anti-Corruption हेल्पलाइन में ही हो गया घोटाला

अरविंद केजरीवाल की Anti-Corruption हेल्पलाइन में ही हो गया घोटाला

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दिल्ली में जोरशोर से शुरू हुई एंटी-करप्शन हेल्पलाइन 1031 ही करप्शन के आरोपों में घिर गई है। हेल्पलाइन चलाने के लिए जिस कंपनी को टेंडर दिया गया, उसके तौर-तरीके में भारी धांधली के आरोप लगे हैं। इस बारे में उसी एंटी-करप्शन ब्यूरो यानी ACB में केस दर्ज किया गया है, जिसके लिए ये हेल्पलाइन बनाई गई थी।

क्या है ये पूरा मामला: आसान भाषा में कहें तो टेंडर निकाले बिना ही सीधे एक कंपनी को हेल्पलाइन का ठेका दे दिया गया। हेल्पलाइन के लिए वर्क ऑर्डर में लिखा गया है कि 10 दिन के अंदर हेल्पलाइन का कॉल सेंटर शुरू हो जाएगा। इस पर 9 मार्च 2015 के दस्तखत हैं। जबकि कंपनी से एग्रीमेंट 13 मई 2015 को हुआ। एग्रीमेंट से करीब डेढ़ महीना पहले 5 अप्रैल को हेल्पलाइन का एलान भी कर दिया गया। मतलब ये हुआ कि हेल्पलाइन पहले शुरू हो गई और एग्रीमेंट बाद में बना। एग्रीमेंट पर कंपनी की तरफ से किसी गवाह के दस्तखत नहीं कराए गए हैं।

किस आधार पर दिया गया ठेका: आम तौर पर ऐसे सरकारी ठेकों में काम की योग्यता और अनुभव जैसे कई पैमाने होते हैं। लेकिन केजरीवाल सरकार ने बिना कॉल सेंटर के कामकाज की जांच किए, हेल्पलाइन नंबर जारी कर दिया। सबसे खास बात ये है कि एग्रीमेंट में इस बात का जिक्र ही नहीं है कि कंपनी को कितने पैसे दिए जाने हैं और हेल्पलाइन में कितने कर्मचारी होंगे।

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