असम में जीतने के बाद अब बीजेपी यूपी में भी करेगी सीएम कैंडिडेट का ऐलान?

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नई दिल्ली: असम की रणनीति कामयाब होने के बाद अब बीजेपी में इस बात की तैयारी शुरू हो गई है कि यूपी में भी चुनाव से पहले पार्टी मुख्यमंत्री का उम्मीदवार घोषित कर दे। हालांकि अभी बातचीत शुरुआती दौर में है, लेकिन पार्टी अब इस बात पर गंभीरता से विचार कर रही है कि यूपी में मुख्यमंत्री के रूप में कैंडिडेट घोषित किया जाए। इससे पार्टी को अखिलेश यादव और मायावती के मुकाबले अपना विकल्प देने का फायदा मिल सकेगा।

BJP-UP

बीजेपी सूत्रों के मुताबिक हालांकि पहले भी कुछ नेता चाहते थे कि यूपी में सीएम कैंडिडेट घोषित किया जाए, लेकिन अब असम के चुनावी नतीजों के बाद पूरी पार्टी में इस मसले पर विचार विमर्श किया जा रहा है। दिल्ली में बीजेपी के एक सीनियर लीडर के मुताबिक निश्चित तौर पर असम के नतीजों से पार्टी अब इस मसले पर गंभीरता से विचार कर रही है। हालांकि यह हो सकता है कि राज्य के लिए मजबूत और साफ छवि वाले नेता को खोजने में कुछ वक्त लगे, लेकिन चुनाव से पहले मुख्यमंत्री उम्मीदवार का नाम घोषित किया जा सकता है।

इससे पहले नरेंद्र मोदी के सत्ता में आने के बाद से दिल्ली को छोड़कर किसी भी राज्य में बीजेपी ने मुख्यमंत्री पद के लिए उम्मीदवार का ऐलान नहीं किया था। ऐसे राज्यों में से हरियाणा, महाराष्ट्र आदि में उसे कामयाबी भी मिली। दिल्ली में किरण बेदी को पार्टी में शामिल करके उन्हें मुख्यमंत्री उम्मीदवार बनाया, लेकिन यह दांव उलटा साबित हुआ। इसके बाद बिहार में पार्टी ने सीएम कैंडिडेट नहीं बनाया, लेकिन वहां भी उसे हार झेलनी पड़ी। अब असम के बाद पार्टी नेताओं को रणनीति के लिहाज से सीएम कैंडिडेट घोषित करने को फायदे के सौदे के तौर पर देखा जा रहा है।

जातिगत समीकरण
पार्टी सूत्रों के मुताबिक यूपी में कई जातियां और वर्ग हैं। ऐसे में पार्टी सभी वर्गों और जातियों के वोट बटोरना चाहेगी। ऐसे में इन जातियों में पैठ रखने वाले नेताओं को मुख्य पद देने होंगे। पार्टी राज्य अध्यक्ष तो पहले ही बना चुकी है। ऐसे में अगर वह सीएम पद के लिए कोई नेता को पेश करती है तो वह भी किसी जाति या वर्ग का प्रतिनिधित्व करेगा। ऐसे में पार्टी को इससे फायदा मिलेगा।

पीएम पर आंच नहीं
सीएम कैंडिडेट के ऐलान का फायदा यह होगा कि अगर राज्य चुनाव में नेगेटिव रिजल्ट भी आता है तो उस हालत में भी सीएम कैंडिडेट के नाम से पार्टी को फायदा होगा। उस हालत में विपक्षी दल सीधे पीएम को निशाना नहीं बना पाएंगे। उस हालत में सीएम कैंडिडेट के नाम के ऐलान से पार्टी के पास बचाव का भी रास्ता रहेगा। हालांकि पार्टी के लिए सीएम कैंडिडेट को चुनना एक बड़ी चुनौती होगी।

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