आदि शंकराचार्य के जीवन की अलौकिक सच्चाई

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आदि शंकराचार्य के जीवन की अलौकिक सच्चाई

1. संन्यासी बालक

संन्यासी बालक

भारतीय इतिहास में ऐसे कई महान दिग्गज हुए हैं, जिनका जीवन ही उनका परिचय रहा है। उन्हें किसी विशेष परिचय की जरूरत नहीं होती। केवल उनका एक जिक्र ही काफी होता है। ऐसा ही एक संन्यासी बालक था जो एक दिन गांव-गांव भटकता हुआ एक ब्राह्मण के घर भिक्षा मांगने पहुंचा।

2. ब्राह्मण घर पहुंचा

ब्राह्मण घर पहुंचा

तब उसकी आयु मात्र सात वर्ष थी। वह ब्राह्मण के घर के बाहर पहुंचा और भिक्षा मांगी। लेकिन यह एक ऐसे ब्राह्मण का घर था जिसके पास खाने तक को कुछ नहीं थ, तो वह भिक्षा कैसे देते। अंतत: ब्राह्मण की पत्नी ने बालक के हाथ पर एक आंवला रखा और रोते हुए अपनी गरीबी का वर्णन किया।

3. मां महालक्ष्मी की कृपा

मां महालक्ष्मी की कृपा

उस महिला को यूं रोता हुआ देख बालक का हृदय द्रवित हो उठा। तभी उस बालक ने मन से मां लक्ष्मी से निर्धन ब्राह्मण की विपदा हरने की प्रार्थना की जिसके पश्चात प्रसन्न होकर महालक्ष्मी ने उस परम निर्धन ब्राह्मण के घर में सोने के आंवलों की वर्षा कर दी। यह थी उस अद्भुत बालक की कहानी, जो ना केवल इस कार्य से बल्कि अपने अनेक कार्यों से सृष्टि में जाना गया।

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