यदि मोदी 1 दंगों के बाद मुसलमानों के दुश्मन कहलाए, तो 457 दंगों के बाद भी मुलायम सिंह यादव ‘मसीहा’ कैसे ?

लखनऊ, अप्रैल 21: अब से कुछ सालों पहले उत्तर प्रदेश में मुस्लिम समाज को इकट्ठा कर राजनैतिक इस्तेमालों के खिलाफ जगाने के उद्देश्य से जन्मी राजनीतिक पार्टी राष्ट्रिय उलेमा काउंसिल के अध्यक्ष मौलाना आमिर रश्दी मदनी ने सत्ताधारी समाजवादी पार्टी को जमकर खरी खोटी सुनाई और मुसलमानों को ‘वोट बैंक’ की तरह प्रयोग करने के लिए मुलायम सिंह व अखिलेश यादव की आलोचना की।

यदि मोदी 1 दंगों के बाद मुसलमानों के दुश्मन कहलाए, तो 457 दंगों के बाद भी मुलायम सिंह यादव ‘मसीहा’ कैसे ?
यदि मोदी 1 दंगों के बाद मुसलमानों के दुश्मन कहलाए, तो 457 दंगों के बाद भी मुलायम सिंह यादव ‘मसीहा’ कैसे ?

वैसे मौलाना आमिर रश्दी मदनी ने अन्य राजनीतिक पार्टियों की भी आलोचना की  और कहा कि धर्मनिरपेक्षता तथा कट्टरपंथ के नाम पर हमेशा से उन्होने मुस्लिम समाज को ठगा है।

प्रख्यात समाचार पत्र दैनिक जागरण में प्रकाशित रपटों के मुताबिक मौलाना ने पूछा कि आखिर कैसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात दंगों के बाद मुसलमानों के दुश्मन कहलाने लगे जबकि यूपी में अपने कार्यकाल के दौरान 457 दंगों के बाद भी मुलायम सिंह यादव ‘मसीहा’ बने हुए हैं।

मौलाना आमिर रश्दी मदनी ने आगे कहा कि सभी पार्टियां अपने अपने फ़ायदों के लिए भाजपा का नाम लेकर डराने की जुगत में लगी हुई हैं।

राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों के दौरान यादवों के वोट बैंक को काटने हेतु मौलाना ने सभी वर्ग के लोगों को इकट्ठा आने का आवाहन किया। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में यादवों का एक बड़ा वोट बैंक मौजूद है जिसके बलबूते मुलायम सिंह यादव की पार्टी ने राज्य में कई बार सत्ता का स्वाद भी चखा है। ऐसा ही कुछ हाल पड़ोसी बिहार का भी रहा है।

मौलाना ने कहा कि यदि ब्राह्मण, मुसलमान, भूमिहार व राजपूत इकट्ठे आ जाएँ तो ऐसी कोई राजनीतिक शक्ति नहीं है जो हमें मात दे सके। इससे यादवों के वोट बैंक को तोड़ा जा सकता है।

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